Mahishasur कौन था? महिषासुर का वध माँ देवी दुर्गा ने क्यों किया

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 दोस्तों navratri के festival में आपने देखा होगा. देश भर में माँ दुर्गा की मूर्ति जगह-जगह बिठाई जाती है. और उस मूर्ति में माँ देवी दुर्गा के साथ एक असुर दैत्य भी होता है. जिसे मूर्ति में देवी दुर्गा द्वारा त्रिसूल से मारते हुए बनाया होता है. इसके अलावा कई tv serials और filme भी बन चुके है. जिसमे माँ दुर्गा और महिषासुर का वर्णन किया गया है.


Hindu festival


अगर आप वह film और serials नहीं देखे है. और आप सिर्फ दुसरो से उसके बारे में सुना है. और आप महिषासुर के बारे में और अधिक जानना चाहते है. तो आज हम आपको इस post के माध्यम से बता रहे है. की महिषासुर कौन था mahisasur का नाम महिषासुर कैसे पड़ा और महिषासुर का वध देवी दुर्गा द्वारा क्यों किया गया. 

महिषासुर कौन था  - who was mahishasura


पौराणिक और प्राचीन कथाओं के अनुसार महिसासुर दैत्यों के राजा रम्भासुर का पुत्र था. एक बार रम्भासुर को जल में रहने वाले भैंस से प्रेम हो जाता है. और दोनों के संयोग से महिसासुर पैदा होता है. पुरुष और महिसि अर्थात भैंस के संयोग से होने के कारण उसका नाम महिसासुर पड़ा. इसके अलावा वह अपना रूप कभी भी इंसान और भैंस में बदल सकता था..


महिसासुर को कौन सा वरदान प्राप्त था ? what blessing was mahishasura received.


महिसासुर असुर तो था ही लेकिन वह भगवान ब्रह्मा का बहुत बड़ा भक्त था. और उसने अमर होने के लिए ब्रह्मा की तपस्या करना सुरु कर दी. उसकी यह कठोर तप और भक्ति को देखते हुए भगवान ब्रह्मा उनसे बहुत खुस हुए. और उसे वरदान मांगने को कहते है.

महिसासुर ने वरदान में अमर होने का वर माँगा. लेकिन ब्रह्मा ने उसे समझाया की जो जन्म लेता है उसे एक दिन मरना होता है. इसलिए तुम्हे अमरता के सिवाए दूसरा वर मांगना होगा. या ऐसा वरदान मांग सकते हो जिसमे तुम्हारी मृत्यु का उपाय कठिन हो. इस तरह भगवन ब्रह्मा की बातो को समझते हुए बहुत सोंच विचार करके. उनकी बातो को मान लेते है.और वरदान में यह मांगते है की उसकी मृत्यु केवल स्त्री के हाथों हो. उसे कोई भी दैत्य असुर और देवता न मार पाए. इस तरह भगवान ब्रह्मा उसे यह वरदान दे देते है.


महिषासुर का वध किसने किया और क्यों  | who killed mahishasura and why


कथाओं के अनुसार महिसासुर को भगवान ब्रह्मा द्वारा वरदान प्राप्त था की उसे केवल स्त्री ही मार पाएगी. तो वह वर मिलने के बाद बहुत ही शक्तिशाली हो जाता है. और वह असुरों का राजा बन जाता है. अपने पीछे लाखो दैत्य सेना बना लेता है. और इस तरह वह तीनो लोको को अपने अधीन कर लेता है. यहाँ तक की देवता भी उसका कुछ नहीं कर पाते है. यह देख भगवान शिव और बाकि देवता भगवान विष्णु के पास सहायता के लिए जाते है.

महिसासुर के वरदान को देखते हुए की उसका देवता भी कुछ नहीं कर सकते. तो विष्णु और बाकि देवता एक सुन्दर और शक्तिशाली देवी का निर्माण करते है. देवी का निर्माण सभी देवताओ के सरीर से निकले तेज प्रकाश से होता है. और सभी देवता उस देवी को अपना-अपना अश्त्र शस्त्र और वरदान देते है. जिससे वह देवी माँ सर्वाधिक शक्तिशाली हो जाती है. जिसके बाद माता देवताओ से कहती है की अब आपको महिसासुर से घबराने की जरुरत नहीं. अब महिसासुर का अंत निकट है. 


अब माँ देवी महिसासुर को मौका देते हुए कहती है की सुधर जाओ और अपना यह अत्याचार समाप्त कर दो. लेकिन महिसासुर उनकी बातो को नहीं मानते और उल्टा उससे विवाह करने की इच्छा रखते है. जिसे सुन देवी बहुत ही क्रोधित हो जाती है. और दोनों के बिच एक भयंकर युद्ध लड़ाई सुरु हो जाती है. यह लड़ाई 9 दिनों तक चलती है. और 9वे दिन माँ देवी शक्ति उसका वध कर देती है. 

इस तरह महिसासुर अपने अहंकार के कारण अपना जीवन गवा देते है. महिषासुर और माँ देवी दुर्गा के बिच हुए 9 दिन के युद्ध के लिए नवरात्री का पर्व मनाया जाता है. और 10वे दिन को महिसासुर के अंत पर विजयादशमी के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाता है. india के कुछ जगहों में अभी भी ऐसे लोग है जो महिसासुर को अपना पूर्वज मानते है. और नवरात्री में उसका सहादत मनाते है. और कुछ राज्यों में महिसासुर की मूर्ति भी बनायीं हुई है. और लोग उनकी पूजा भी करते है. 

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